"अधूरे पते की वजह से आपका पार्सल रुका है" — इंडिया पोस्ट का फ़र्ज़ी SMS कैसे पहचानें
फ़र्ज़ी मैसेज असली मैसेज के मुक़ाबले कैसा दिखता है, लिंक छुए बिना अपना पार्सल कैसे चेक करें, और अगर आपने लिंक खोल लिया, कार्ड की जानकारी डाल दी या पैसे दे दिए, तो अगले एक घंटे में ठीक-ठीक क्या करना है।
पार्सल का इंतज़ार है? सुरक्षित तरीके से चेक करें
अपना कंसाइनमेंट नंबर ख़ुद हमारे ट्रैकर में टाइप करें। SMS वाला लिंक कभी इस्तेमाल न करें।
वह SMS फ़र्ज़ी है। इंडिया पोस्ट लिंक के ज़रिए पता अपडेट करने के लिए मैसेज नहीं भेजता, और न ही लिंक से कोई "redelivery fee" लेता है। PIB Fact Check इन मैसेज को कई बार फ़र्ज़ी बता चुका है, और इंडिया पोस्ट के अपने होमपेज पर अब एक फ़्रॉड अलर्ट है, जो लोगों से कहता है कि मिलते-जुलते लिंक न खोलें और उनके ज़रिए OTP, कार्ड, UPI या बैंक की जानकारी शेयर न करें।
अगर आप सच में किसी चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं, पासपोर्ट, एडमिट कार्ड, घर से आया पार्सल, तो घबराइए मत। स्कैम वाले मैसेज से आपके असली पार्सल पर कोई असर नहीं पड़ता। भेजने वाले से या अपनी रसीद से कंसाइनमेंट नंबर लें, उसे हमारे ट्रैकर में या इंडिया पोस्ट की वेबसाइट, indiapost.gov.in, पर टाइप करें, और कुछ ही सेकंड में उसका असली स्टेटस दिख जाएगा।
लिंक पर टैप कर चुके हैं या ₹25 या ₹100 दे चुके हैं? सीधे नुक़सान रोकने वाले स्टेप पर जाइए। वहां सबसे ज़्यादा मायने रफ़्तार रखती है।
इंडिया पोस्ट का फ़र्ज़ी SMS कैसा दिखता है
शब्द बदलते रहते हैं, लेकिन कहानी हमेशा वही होती है: पार्सल वेयरहाउस पहुंच गया, पता अधूरा होने से डिलीवरी फ़ेल हो गई, और लौटाए जाने से पहले इसे "अपडेट" करने के लिए आपके पास 12, 24 या 48 घंटे हैं। नीचे वे मैसेज हैं जिन्हें फ़ैक्ट-चेकर्स और ख़बरों ने छापा है, लिंक तोड़कर ([.]) ताकि वे खुल न सकें।
PIB Fact Check द्वारा रिपोर्ट, Asianet Newsable के ज़रिए
डोमेन .one पर ख़त्म होता है। "gov-in" तो बस उस नाम का हिस्सा है जो स्कैमर ने ख़रीदा है।
एक iPhone यूज़र का बताया iMessage, Business Today के ज़रिए
iMessage से भेजा गया, "Indi Post" के नाम से, और .top साइट का लिंक।
Quick Heal द्वारा बताया गया एक और रूप
पता अपडेट करने के लिए "छोटी सी फ़ीस"। इंडिया पोस्ट मैसेज से ऐसा नहीं करता।
इन स्कैम में इस्तेमाल हुए डोमेन
Fortinet के सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने जनवरी से जुलाई 2024 के बीच इंडिया पोस्ट की नक़ल करने वाले 470 से ज़्यादा डोमेन रजिस्ट्रेशन गिने, ज़्यादातर .vip, .top और .buzz जैसी सस्ती एंडिंग पर। Resecurity ने भी इसी कैंपेन को ट्रैक किया। कुछ असली उदाहरण:
| फ़र्ज़ी डोमेन | चाल | किसने बताया |
|---|---|---|
| indund[.]cyou | .cyou एंडिंग पर कोई भी बेतुका नाम | इंडिया पोस्ट के होमपेज का अलर्ट |
| indiapost-gov-in[.]one | नाम में "gov-in" डाला, पर एंडिंग .one | PIB Fact Check |
| indiapost[.]top | असली ब्रांड नाम, ग़लत एंडिंग | Fortinet |
| inddiapost[.]top | एक एक्स्ट्रा "d", जो फ़ोन पर दिखेगा ही नहीं | Resecurity |
| indiapostyt[.]vip | ब्रांड नाम के साथ फ़ालतू अक्षर | Resecurity |
| iydc[.]in/u/… | छोटा लिंक, जो छिपा देता है कि वह कहां जाता है | CyberPeace Foundation |
एक नियम जो हर चाल पर भारी है: इंडिया पोस्ट की वेबसाइट indiapost.gov.in है। पता ठीक .gov.in पर ही ख़त्म होना चाहिए। "indiapost-gov-in" के बाद .one, .top या .com हो, तो वह असली नहीं है।
इंडिया पोस्ट का असली SMS बनाम फ़र्ज़ी — आमने-सामने
इंडिया पोस्ट असली मैसेज भी भेजता है। उसके Speed Post पेज पर SMS से डिलीवरी की सूचना का ज़िक्र है। ये मैसेज आपको कुछ बताते हैं। ये लिंक के ज़रिए पैसे देने या कुछ "अपडेट" करने को नहीं कहते।
| क्या देखें | इंडिया पोस्ट का असली मैसेज | स्कैम मैसेज |
|---|---|---|
| किसने भेजा | रजिस्टर्ड लेटर हेडर, फ़ोन नंबर नहीं | अक्सर कोई आम मोबाइल नंबर, या ईमेल एड्रेस (iMessage) |
| क्या लिखा है | आपके आर्टिकल नंबर के साथ स्टेटस अपडेट | "Delivery failed", "incomplete address", "warehouse" |
| डेडलाइन | कोई नहीं | 12, 24 या 48 घंटे "वरना लौटा दिया जाएगा" |
| पता अपडेट करने का लिंक | कभी नहीं | हमेशा — पूरा खेल इसी का है |
| पैसे की मांग | SMS लिंक से कभी नहीं | ₹25.02, ₹80 या ₹100 की "redelivery fee", आमतौर पर सिर्फ़ कार्ड से |
| वेबसाइट | indiapost.gov.in | इसके अलावा कुछ भी: .top, .vip, .cyou, .one, छोटे लिंक |
भेजने वाले के बारे में: मई 2025 से TRAI के नियमों के तहत बिज़नेस और सरकारी SMS हेडर के आख़िर में मैसेज का प्रकार बताने वाला एक अक्षर होना ज़रूरी है: सर्विस के लिए -S, ट्रांज़ैक्शनल के लिए -T, प्रमोशनल के लिए -P और सरकारी के लिए -G। किसी असली संस्था का मैसेज "VM-XXXXXX-S" जैसे हेडर से आता है, किसी अनजान के मोबाइल नंबर से नहीं। Digit ने इंडिया पोस्ट का हेडर "INPOST-G" बताया है, लेकिन स्कैमर हेडर की भी नक़ल करते हैं, इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका है कि अपने ही फ़ोन में इंडिया पोस्ट का कोई पुराना SMS ढूंढकर मिलान करें।
सही दिखने वाला सेंडर भी अपने आप में सबूत नहीं है। जो भी मैसेज पैसे या कार्ड की जानकारी मांगे, उसे स्कैम ही मानें, चाहे वह किसी के भी नाम से आया हो।
क्या यह इंडिया पोस्ट SMS असली है? 30 सेकंड की जांच
अगर इनमें से एक का भी जवाब "हां" है, तो मैसेज डिलीट कर दीजिए।
क्या इसमें कोई लिंक है?
पता अपडेट करने और पेमेंट वाले लिंक ही स्कैम हैं। पार्सल चेक करने के लिए किसी लिंक की ज़रूरत ही नहीं है।
क्या यह किसी फ़ोन नंबर या ईमेल एड्रेस से आया?
इंडिया पोस्ट के नाम वाले फ़र्ज़ी iMessage Gmail और Hotmail एड्रेस से आए हैं। असली बल्क SMS रजिस्टर्ड हेडर से आते हैं।
क्या कोई उलटी गिनती है?
"48 घंटे में वरना पैकेज लौट जाएगा" दबाव बनाने के लिए है, ताकि आप सोचने से पहले कुछ कर बैठें।
क्या ट्रैकिंग नंबर नहीं है, या आपके नंबर से मेल नहीं खाता?
असली Speed Post नंबर 13 अक्षरों के होते हैं, जैसे EE123456789IN। हमारी कंसाइनमेंट नंबर फ़ॉर्मेट गाइड बताती है कि इसे कैसे पढ़ें।
अजीब स्पेलिंग या नाम?
"Indi Post!", वाक्य के बीच में बेवजह कैपिटल अक्षर, टूटी-फूटी ग्रामर। ये मैसेज थोक में भेजे जाते हैं और अक्सर कोई इन्हें दोबारा पढ़ता तक नहीं।
अपना असली पार्सल सुरक्षित तरीके से कैसे चेक करें
यह स्कैम इसलिए चलता है क्योंकि समय सही लगता है। मान लीजिए आपके भाई ने सोमवार को लखनऊ से आपके कागज़ भेजे और बुधवार को यह मैसेज आ गया। मैसेज को छुए बिना असली हाल ऐसे पता करें।
कंसाइनमेंट नंबर किसी भरोसेमंद जगह से लें
यानी बुकिंग रसीद, भेजने वाला, या वह आधिकारिक साइट जिसने आपका डॉक्यूमेंट भेजा (पासपोर्ट, PAN, बैंक कार्ड)। संदिग्ध SMS वाला नंबर नहीं, क्योंकि वह मनगढ़ंत हो सकता है।
वेबसाइट का पता ख़ुद टाइप करें और ट्रैक करें
ब्राउज़र में नया टैब खोलें और SpeedIndiaPost.com पर जाएं, या indiapost.gov.in टाइप करें, या इंडिया पोस्ट का Dak Sewa ऐप इस्तेमाल करें। नंबर डालें। आपको उसकी स्कैन हिस्ट्री दिखेगी, जैसे बुक हुआ, डिलीवरी ऑफिस पहुंचा, डिलीवरी के लिए निकला।
पढ़ें कि स्टेटस असल में क्या कहता है
अक्सर पार्सल बस रास्ते में होता है, और SMS वाली "डिलीवरी फ़ेल" कभी हुई ही नहीं। किसी लाइन का मतलब समझ न आए, तो हमारी ट्रैकिंग स्टेटस गाइड हर स्टेटस समझाती है।
अगर ट्रैकिंग में सच में डिलीवरी की नाकाम कोशिश दिखे, तो ID लेकर अपने डिलीवरी पोस्ट ऑफिस को फ़ोन करें या वहां जाएं और पूछें कि आइटम कैसे लें या दोबारा डिलीवरी कैसे हो। यह मामला सीधे पोस्ट ऑफिस से सुलझाएं, मैसेज के किसी लिंक से कभी नहीं। "Delivery Attempted" के बाद क्या करें वाली हमारी गाइड में पूरा तरीका है।
फिर भी शक है? सीधे इंडिया पोस्ट से पूछें
इंडिया पोस्ट की टोल-फ़्री हेल्पलाइन 1800 266 6868 (उसकी वेबसाइट के मुताबिक़ सुबह 8 से रात 8 बजे) पर कॉल करें और कंसाइनमेंट नंबर बताएं। संदिग्ध SMS में लिखे किसी नंबर पर कॉल न करें।
लिंक खोल लिया या पैसे दे दिए? अभी यह करें, इसी क्रम में
पहले एक गहरी सांस लीजिए। बहुत से समझदार लोग इसमें फंस जाते हैं, ख़ासकर जब वे सच में किसी पार्सल का इंतज़ार कर रहे हों। अब सबसे ज़्यादा मायने यह रखता है कि आप कितनी जल्दी कदम उठाते हैं। ₹25 असली मुसीबत नहीं है। स्कैमर्स को आपका कार्ड नंबर, CVV और OTP चाहिए, ताकि वे इससे कहीं ज़्यादा ख़र्च कर सकें।
| आपने क्या किया | ख़तरा | क्या करें |
|---|---|---|
| सिर्फ़ लिंक खोला, कुछ टाइप नहीं किया | कम | टैब बंद करें, ब्राउज़र हिस्ट्री साफ़ करें, Chakshu पर SMS की रिपोर्ट करें |
| नाम, पता, फ़ोन, ईमेल डाला | मध्यम | इंडिया पोस्ट या बैंक बनकर आने वाली स्कैम कॉल्स के लिए तैयार रहें। OTP कभी शेयर न करें। Chakshu पर रिपोर्ट करें |
| कार्ड नंबर, एक्सपायरी, CVV डाला | ज़्यादा | कार्ड अभी ब्लॉक करें, फिर 1930 पर कॉल करें |
| पैसे दे दिए, या OTP शेयर कर दिया | ज़्यादा — पैसा शायद निकल भी रहा हो | कार्ड या UPI ब्लॉक करें, 1930 पर कॉल करें, बैंक को लिखित शिकायत दें |
| लिंक से कोई ऐप या फ़ाइल इंस्टॉल की | ज़्यादा | एयरप्लेन मोड चालू करें, उसे अनइंस्टॉल करें, कार्ड ब्लॉक करें, किसी दूसरे डिवाइस से बैंकिंग पासवर्ड बदलें |
कार्ड ब्लॉक करें (2 मिनट)
अपना बैंक ऐप खोलें और कार्ड ब्लॉक या "hotlist" का ऑप्शन इस्तेमाल करें, या उस कार्ड के ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन बंद कर दें। न मिले तो कार्ड के पीछे छपे कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें। बैंक का नंबर ऑनलाइन सर्च न करें, क्योंकि नकली हेल्पलाइन नंबर ख़ुद एक अलग स्कैम हैं।
खाते से पैसे गए हैं तो 1930 पर कॉल करें
1930 राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है, जो भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत चलती है। यह उस सिस्टम से जुड़ी है जिससे बैंक चोरी का पैसा निकाले जाने से पहले उसे फ़्रीज़ करने की कोशिश करते हैं, इसलिए जितनी जल्दी हो सके कॉल करें। ट्रांज़ैक्शन ID, समय और रक़म तैयार रखें।
cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, cybercrime.gov.in, पर वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्ट करें। SMS (सेंडर दिखते हुए), फ़र्ज़ी वेबसाइट और बैंक के डेबिट मैसेज के स्क्रीनशॉट अपलोड करें। एकनॉलेजमेंट नंबर सेव कर लें। बैंक इसे मांग सकता है।
UPI से पैसे दिए? ऐप में और बैंक के पास शिकायत करें
अपने UPI ऐप की हिस्ट्री में वह ट्रांज़ैक्शन खोलें और "Raise a complaint", "Report" या "Help" इस्तेमाल करें। शिकायत का रेफ़रेंस नंबर नोट कर लें। अपने बैंक को भी बताएं: UPI ट्रांज़ैक्शन ID के साथ उन्हें कॉल करें या लिखें।
पासवर्ड बदलें और स्टेटमेंट पर नज़र रखें
अगर आपने उस पेज पर कोई पासवर्ड या नेट-बैंकिंग लॉगिन टाइप किया था, तो उसे बदल दें। फिर अगले कुछ हफ़्तों तक रोज़ अपने खाते और कार्ड का स्टेटमेंट देखें, छोटे-छोटे "टेस्ट" चार्ज भी।
Sanchar Saathi के Chakshu पर SMS की रिपोर्ट करें
Chakshu संदिग्ध फ़्रॉड कॉल, SMS और WhatsApp मैसेज की रिपोर्ट लेता है ताकि उन पर कार्रवाई हो सके। लेकिन यह सिर्फ़ मैसेज की रिपोर्ट के लिए है। Chakshu साफ़ कहता है कि अगर पैसे जा चुके हैं, तो 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें, इसलिए पहले स्टेप 2 और 3 करें।
बैंक को जल्दी बताना क्यों ज़रूरी है: अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांज़ैक्शन पर RBI के नियमों के तहत, अगर नुक़सान इसलिए हुआ क्योंकि आपने पेमेंट की जानकारी शेयर की, तो बैंक को रिपोर्ट करने तक का नुक़सान आपका होता है। रिपोर्ट करने के बाद जो भी पैसा निकलता है, उसकी ज़िम्मेदारी बैंक की है। रिपोर्ट के बाद बैंक को 90 दिन के अंदर शिकायत निपटानी होती है। बैंक को शिकायत लिखित में (ईमेल या ऐप से) करें ताकि उस पर समय दर्ज रहे।
शिकायत के लिए तैयार शब्द
इसे अपने बैंक के ईमेल या साइबर क्राइम पोर्टल के विवरण में कॉपी करें और अपनी जानकारी भरें:
फ़र्ज़ी SMS की रिपोर्ट कैसे करें (भले ही आपने क्लिक न किया हो)
रिपोर्ट करने में कुछ ही मिनट लगते हैं और इससे ये नंबर और साइटें आपके माता-पिता तक पहुंचने से पहले बंद करवाने में मदद मिलती है।
Sanchar Saathi पर Chakshu
sancharsaathi.gov.in पर Chakshu खोलें और SMS को संदिग्ध फ़्रॉड कम्युनिकेशन के रूप में रिपोर्ट करें। इसकी कैटेगरी में सरकारी अधिकारियों का भेस धरना भी शामिल है। जल्दी रिपोर्ट करें: कार्रवाई के लिए Chakshu 30 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगता है। सेंडर और समय दिखाता स्क्रीनशॉट रख लें।
इंडिया पोस्ट
इंडिया पोस्ट को उसके ऑनलाइन शिकायत पोर्टल (indiapost.gov.in से लिंक), Dak Sewa ऐप के शिकायत ऑप्शन, या 1800 266 6868 हेल्पलाइन से बताएं। फ़र्ज़ी वेबसाइट का पता ज़रूर बताएं। हमारी इंडिया पोस्ट शिकायत गाइड पोर्टल के स्टेप दिखाती है।
iPhone: Report Junk
इनमें से कई मैसेज ईमेल एड्रेस से iMessage के रूप में आते हैं। मैसेज के नीचे "Report Junk" इस्तेमाल करें, फिर उसे डिलीट कर दें। जवाब न दें। "STOP" लिखने से भी उन्हें पता चल सकता है कि आपका नंबर चालू है।
PIB Fact Check
PIB Fact Check सरकार से जुड़े संदिग्ध मैसेज अपनी वेबसाइट, factcheck.pib.gov.in, पर दिए WhatsApp नंबर और ईमेल एड्रेस के ज़रिए लेता है। जब कोई नया मैसेज फैलने लगे, तब यह काम आता है।
पार्सल से जुड़े दूसरे स्कैम जो चल रहे हैं
SMS सिर्फ़ एक रूप है। जैसा RBL Bank और Quick Heal के ब्लॉग बताते हैं, स्कैमर मैसेज के बाद इंडिया पोस्ट का प्रतिनिधि बनकर फ़ोन भी कर सकते हैं।
"कस्टम ड्यूटी" वाली कॉल
कोई कॉल, SMS या ईमेल कहता है कि आपका पार्सल कस्टम में रुका है और छुड़ाने से पहले ड्यूटी या "clearance fees" भरनी होगी, आमतौर पर किसी निजी खाते में। CBIC कह चुका है कि भारतीय कस्टम अधिकारी कभी फ़ोन, SMS या ईमेल से लोगों को निजी खातों में ड्यूटी जमा करने को नहीं कहते, और असली कस्टम पत्राचार पर एक Document Identification Number (DIN) होता है जिसे CBIC की वेबसाइट पर जांचा जा सकता है। अगर आपका कोई अंतरराष्ट्रीय पार्सल सच में ड्यूटी के लिए रुका है, तो कस्टम में फंसे पार्सल वाली हमारी गाइड बताती है कि असली ड्यूटी कैसे भरी जाती है।
"पार्सल में ड्रग्स" वाली कॉल और "डिजिटल अरेस्ट"
कॉल करने वाला कहता है कि आपको भेजे गए या आपके भेजे पार्सल में ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या कोई और ग़ैरक़ानूनी सामान है। फिर पुलिस, CBI, नारकोटिक्स या किसी और अफ़सर बने लोग आपको तब तक वीडियो कॉल पर रोके रखते हैं जब तक आप पैसे न दे दें। प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भारतीय क़ानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई व्यवस्था नहीं है, और कोई भी जांच एजेंसी फ़ोन या वीडियो कॉल पर इस तरह पूछताछ नहीं करती। फ़ोन काट दें, परिवार के किसी सदस्य को बताएं, और अगर कुछ भी पैसे दिए हैं तो 1930 पर कॉल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अभी क्या करें
- क्लिक नहीं किया? SMS डिलीट करें, Chakshu पर रिपोर्ट करें, और यह पेज अपने माता-पिता के WhatsApp ग्रुप में भेज दें।
- कार्ड की जानकारी डाल दी? कुछ भी और करने से पहले अपने बैंक ऐप में कार्ड ब्लॉक करें।
- पैसे चले गए? अभी 1930 पर कॉल करें, फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और ऊपर दिए शब्दों के साथ बैंक को ईमेल करें।
- पार्सल का इंतज़ार है? अपनी रसीद वाले नंबर से नीचे ट्रैक करें। अगर डिलीवरी की नाकाम कोशिश दिखे, तो ID लेकर पोस्ट ऑफिस जाएं।
अपने असली पार्सल का स्टेटस देखें
पूरी स्कैन हिस्ट्री के साथ मुफ़्त ट्रैकिंग। मैसेज में कोई लिंक नहीं, कोई फ़ीस नहीं, कोई लॉगिन नहीं।
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